यादों-स्वादों में ही रह गया देसरिया धान का चिउरा

Desh page2

 

मन में वर्षा का पानी समय से भरता ही नहीं है। वर्षा पिछले कई सालों से कम हुई है। होती भी है तो अनियत। इलाके में धान की फसल प्रभावित तो हुई ही, इस मन के देसरिया धान को तो पूरी तरह से चौपट ही कर गई है। जानकारों का कहना है कि यह जलवायु में हो रहे परिवर्तन के लक्षण हैं। अनियत वर्षा या वर्षा का समय खिसकने के कारण फसलों पर गंभीर प्रभाव हो रहे हैं। धान के साथ कई अनाज प्रभावित हुए हैं।

The story can be read at http://www.maitry.blogspot.in/2012/11/blog-post.html 

बदलते मौसम में बदलने होंगे कई तौर तरीके

जलवायु परिवर्तन फिलहाल दुनिया की सबसे बड़ी चिंता है। इसके संकट से निपटने की सभी कोशिशें अभी तक बेनतीजा रही है। जलवायु परिवर्तन की वजह से खाद्यान्न उत्पादन पर इसके पड़नेवाले असर को लेकर देश व दुनिया चिंतित है। इस संकट और भारत में उसके लिए हो रही कोशिशों पर सेन्ट्रल रिसर्च इंस्टिट्यूट फॉर ड्राईलैंड एग्रीकल्चर (क्रीडा ) के निदेशक बी वेंकटेश्वरलु से अतुल कुमार सिंह ने बात की। पेश है बातचीत के अंश।

http://paper.hindustantimes.com/epaper/services/OnlinePrintHandler.ashx?issue=42142012123000000000001001&page=10&paper=A3