पड़ रही है प्रकृति और व्यवस्था की मार

Atulji

मुजफ्फरपुर  अतुल कुमार सिंह

जलवायु परिवर्तन केवल पर्यावरण का ही मुद्दा नहीं है बल्कि इससे आनेवाली पीढी के लिए गंभीर समस्या उत्पन्न होनेवाली है। एक आकलन के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन से हो रहे नुकसान का 75 से 80 प्रतिशत मूल्य विकासशील देशों को चुकाना पड़ेगा। इसके लिए विकासशील देशों को हर साल 80 अरब डॉलर की जरूरत होगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्थापन का अध्ययन करनेवाली संस्था आईडीएमसी के मुताबिक, 2010 में बाढ़ एवं सूखे की वजह से दुनिया भर में करीब 4 करोड़ महिलाओं और बच्चाों को पलायन करना पड़ा है। आईडीएमसी के अनुसार, अगले 30 सालों में 16 देशों में जलवायु संकट बुरी से प्रभाव डालेगा। इनमें से 10 देश केवल एशिया के हैं। खेतिहर किसान, मजदूर, पशुपालक और मछुआरे इसके प्रभाव में आनेवाले सबसे सरल लक्ष्य हैं।

 

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